नैनीताल की सैर - Part 4

By kartikey tripathi
Last modified 23 Nov 2018

नैनीताल की सैर भाग 4 last

मैंने ड्राइवर का मोबाईल नंबर लगाया लेकिन नंबर नहीं लगा अब मै पूरा थक चूका था और इस जगह से वापसी में कोई वाहन नहीं था अब मुझे नैनीताल शहर तक पैदल ही जाना था लेकिन ड्राइवर तो मुझे शॉटकट रस्ते से लाया था जो मुझे पता नहीं था तो मैं मैन रोड से ही वापस चलने लगा २ या ३ किमी चलने के बाद भी मुझे शहर का कोई नमोनिशान न मिला इस समय दो या ढाई बज रहे थे और स्कूलों की छुट्टी हो चुकी थी मेरे सामने से एक खूबसूरत सी प्यारी लड़की अपनी नजरे मोबाइल की स्क्रीन पर गड़ाए चली आ रही थी तो मैंने उसे रोका और मुख्य शहर का रास्ता पूछा उसने बताया अगर आप इस रोड से जाओगे तो बहुत दूर पड़ेगा और बहुत थक जाओगे वो थोड़े से आगे जाकर लेफ्ट हैण्ड पर एक पतली सी गली निचे की ओर जा रही है चले जाओ और मैंने उसे थैंक्यू बोला और चल पड़ा और उसी रस्ते पे चल दिया| 
नैनीताल शहर के सभी रस्ते बहुत खूबसूरत है एक पक्की सड़क निचे जा रही थी और आसपास दोनों तरफ घर बने हुए थे मेरे आगे आगे एक प्रेमी जोड़ा बाहों में बांहे डाले जा रहा था लड़की के बाल हवाओ में उड़ रहे थे और दोनों एक दूसरे का हाथ थामे जा रहे थे मुझे उन दोनों को देखकर ख़ुशी हुयी और मै उनके पीछे पीछे आसपास के घरो को निहारते हुए चलता रहा लेकिन मन में ये भी डर था की कोई मुझे टोक न दे की हमारे घरो को इतने गौर से क्यों देख रहे हो|
मैं उसी रास्ते से नीचे उतरता रहा और फिर शहर के नजदीक आ पहुंचा यहां मैंने देखा पहाडी जीवन की मुश्किलो कि एक झलक देखी की रसोई गैस के सिलेंडर को हॉकर अपनी पीठ पर रख कर ऊपर चढ़ाते है जिससे पहाड़ की समस्याओं को समझा जा सकता है की सामान्य इस्तेमाल की चीजें भी कितनी कठिनाई से घरो तक पहुंचती है | 
उस रास्ते से अब मैं मल्लीताल में सेवायोजन कार्यालय के पास पहुंचा था अब यहां पर काफी भीड्भाड वाला बाजार है मै चलता हुया आगे रोड पर आ गया था जहा पर राजभवन के रास्ते को इंगित करने वाला साइन बोर्ड लगा हुया था मुझे राजभवन भी देखना था, और पता चला था उसी रास्ते पे राजभवन से पहले ही डीएसबी कालेज पढता है|
डीएसबी कालेज से ही उस लडकी ने ग्रेजुएशन की थी तो कालेज मे जाने का दिल था| तो अब मै उस रास्ते से चलता हुया मस्जिद के पास पहुंच चुका था नैनीताल की मस्जिद कारीगरी का सुन्दर उदाहरण है| मैं बिना थके और बिना किसी विश्राम के अपनी मंजिलो की तरफ बढ्ता जा रहा था, अब नैनीताल का विशाल प्ले ग्राउंड आ चुका था दिन मे अब ज्यादा टाइम नही बचा था जिससे मै बिना इस ग्राउंड मे रुके इसके बीचो बीच से होता हुया कालेज को जाने वाली रोड पर पहुंच चुका था अब कुछ भूख का भी अहसास था इस जगह पर खाने पीने वाली चीजो की बडिया दुकान मिली तो वहां पर ताजे और गर्मागर्म ब्रेडपकौडे बन रहे थे 5 मिनट के इंतजार के बाद मुझे ब्रेड पकौडे मिले जो बहुत ही स्वादिष्ट थे और एक पानी की बोतल ले के मैं फिर अपने रास्ते की तरफ बड्ने लगा कालेज को जाने वाले रास्ते से झील का अलग ही नजारा था झील पेडो के झुरमुटो के बीच मे से किसी फ्रेम मे उतारी गयी तस्वीर सी नजर आती है|
यह रास्ता भी चढाई वाला है पूरा दिन चलने के कारण अब थकान हावी होने लगी थी रस्ते के एक तरफ बहुत ऊंचाई जैसी हल्की पहाडी है जिसपे कही कही पर इक्का दुक्का घर भी बने हुये है और दूसरी तरफ नैनीझील अदभुत नजारा है इस रास्ते का| दोपहर के लगभग चार या साढे चार बज चुके थे लड्के लड्किया कालेज से वापस लौट रहे थे कुछ प्रेमी जोडे थे जो अलग ही अपनी दुनिया मे मस्त चले जा रहे थे कुछ बडे वडे ग्रुप मे थे अब तक वापस आने वालो से पूरी सड्क भर चुकी थी, नैनीताल की लड्कियां भी नैनीताल जैसी ही बहुत सुंदर है|
मै 2 से 3 किमी इस रास्ते पे आ चुका था और अब बहुत थक चुका था तो झील के किनारे पर एक 1 फुट चौडी दीवार बनी हुयी है जिसमे बैठ गया और कुछ फ़ोटो ली दिन ढलने वाला था और मुझे चलते रहना था ठोडे आगे और जाने पर डीएसबी कैम्पस कालेज आगया, कालेज का अगले दिन एनुअल फंकशन था जिसकी तैयारियं जोरो पर चल रही थी लडके लडकियां डांसिंग और गायन की तैयरियों मे लगे थे कालेज पहुंच कर एक अलग ही फीलिंग थी कि जिससे मै प्यार करता हूँ वो इसी कालेज मे पढी थी| टाइम कम था और मुझे राजभवन पहुंच कर वापस भी आना था तो मै बिना समय बर्वाद किये फिर आगे बढ चला अब अंधेरा होने लगा था आगे सड्क सूनसान थी मै 1 किमी आगे जा चुका था फिर भी राजभवन का अता पता नही था मै जिससे भी पुंछ्ता वो बोल देता आगे है, थकान अब हावी हो चुकी थी अधेरा घना होने लगा था और अब सड्क पर कोई रास्ता बताने वाल भी नही मिल रहा था तो मन मे आया कि वापस ही लौट्ना चाहिये और समय तथा थकान के आगे मुझे हारकर वापस लौट्ना पडा|
लौट कर अब मै कैपिटल सिनेमा और पार्क के आगे वाले शाम को लगने वाले बाजार से होता हुया पार्क की खाली पडी बेंच पर बैठ गया अब तक 8बज चुके थे| 5 मिनट आराम करने के बाद लडकी को फोन लगाया और बात की हाय हैल्लो के बाद उसने पुछा 
लड्की : देखो वहां पर चांद कैसा निकला हुया है
मैं : नैनीताल मे आज चांद भी बहुत खूबसूरत है लेकिन तुम्हारे कितना तो नही 
लड्की : अरे यहां तो चांद को बादलों ने ढका हुया है और मुझे बिलकुल भी चांद नजर नही आ रहा, मुझे अपने घर से चांद को देखना बहुत पसन्द था मै रोज चांद को देखा करती थी....... अच्छा ये बताओ तुम साथ मे गर्म कपडे तो लाये हो ना..
मैं : नही
लडकी : क्या..... इस टाइम तो बहुत ठ्न्ड होगी वहां... मैं : हाँ मुझे छोडकर सभी लोग गर्म कपडो मे है... लडकी : तो उठो और अभी एक स्वेटर खरीदो और पहनो| 
मैने फिर उसी मार्केट से एक स्वेटर खरीदा और पहना अब तक 9 बज चुके थे अब मै खाना खाने के लिये ढाबे की तलाश मे बस स्टैंड के सामने से कुछ आगे वाली रोड जो ठ्ण्डी सडक को जाती है उसकी विपरीत दिशा मे पतली से सडक के अन्दर वाले मार्केट मे पहुंचा उस ढाबे पर खाना खा रहा था कि एक लड्का आया और बोला सर होटल लेना हो तो बताइये मैंने कहा कि मै खुद ही ढूंड लूंगा और बाहर निकला अबतक 10 बज चुके थे आफ सिजन की वजह से होटलो मे सन्नाटा था और उधर जो भी 3 या 4 छोटे मोटे होटल थे वो बन्द पडे थे अब वक्त भी निकल रहा था कि ज्यादा लेट हुया तो क्या पता होट्ल भी ना मिले मै तुरन्त वापस उसी ढाबे पर आया और ढाबे वाले से उसी लडके को बुलाने को कहा 4 या 5 बार मे उसने फोन उठाया और फिर आकर मुझे 400 रुपये मे होटल दिलवाया|
थकान की वजह से पता भी ना लगा कब सुबह हुयी, 7 बजे उठा और तैयार होकर चाय पी और मेरे सामने सुबह की किरणो मे नहायी हुयी सुंदर सी झील थी बहुत सारी बतखे पानी मे तैर रही थी तो मैं झील को निहारते हुए अपने बाये हाथ की तरफ मूड के आगे बढ़ने लगा आगे ठंडी सड़क है नैनीताल में ठंडी सड़क की भी अलग ही पहचान है शहर में शांत जगह तलाशने वाले ठंडी सड़क पर आते है यही से आगे चलता हुआ मैं पाषाण देवी मंदिर पहुँच गया माथा टेकने के बाद आगे झील के किनारे एक जगह थी यहां पर झील की किनारे पानी में एक बड़ा सा पत्थर रखा हुआ था मैं उस पर बैठ कर झील के शांत पानी को निहारता रहा और अपने पैरो को पानी में डालकर बैठा रहा| आगे एक बड़े से ऑफिस टाइप में कुछ झील से संबंधित यंत्र थे वो कोई सयंत्र टाइप का था उसके आगे सीढिया बनी हुयी थी जहा पर एक तैराकी के मास्टर लड़को को तैराकी सीखा रहे थे, मुझे भी लगा मैं भी पानी में उतर जाऊ लेकिन सोचा भीगे कपड़े लिए कहा घूंमूंगा आगे जाकर नयना देवी मंदिर पहुंचा
नयना देवी मंदिर में वातावरण बहुत ही आध्यात्मिक था दर्शन करने वालो की बहुत भीड़ थी मंदिर में नयना देवी के साथ साथ हुनुमान जी और शंकर जी की भी मूर्तियां स्थापित है मंदिर बिलकुल ही झील के तट पर स्थित है और किनारे पर रेलिंग लगी हुयी है वहां से पानी में चलती फिरती मछलियों को देखा जा सकता है मैं बाहर से एक पैकेट ब्रेड का लेकर आया और मछलियों को खिलाने लगा की इतने में ही हजारो हजार मछलिया खाने के लिए इकठ्ठा हो गयी ये देखने में बहुत सूंदर नजारा था लेकिन नैनीझील में मछलियों को किसी प्रकार का खाना खिलने पे पूर्णतया प्रतिबंद है उस समय आसपास बहुत से बंगाली समुदाय के पर्यटक मंदिर में और आसपास घूम रहे थे मुझे मछलियों को खाना खिलाते हुए देखते हुए बहुत से बंगाली पर्यटक ये देखने लगे और उनमे से एक महिला मेरे पास आकर कुछ ब्रेड उसे देने के लीये बोलने लगी तो मैंने बाकि बचे हुए ब्रेड उसे दे दिए जो वो भी मछलियों को खिलाने लगी | 
उस दिन मैंने झील के 2 चक्कर पैदल पैदल लगा डाले और झील में बोटिंग का आनंद लिया मंदिर के पास ही चाइना टाउन है जहा पर सभी तरह के रेस्त्रां है वही अंदर की साइड पर भोटिया मार्किट है जहा पर सभी तरह के कपड़े मिल रहे थे| आगे जाकर मैंने एक मैगी खायी और भरपेट मोमोज खाये इतने स्वादिष्ट मोमौज कही पर भी मिलना मुश्किल ही है खासकर दिल्ली या किसी भी मैदानी इलाको में| 
नैनीताल एक छोटा सा पहाड़ी शहर है लेकिन यहां पर सभी तरह के ब्रांड के शोरूम और आउटलेट उपलब्ध है माल रोड पर आप डोमिनोज पिज्जा का भी आनंद ले सकते है| धीरे धीरे समय बीत रहा था अब शाम ढल चुकी थी मुझे खाना खाकर अपने घर के लिए वापस निकलना था तो उसी ढाबे पे खाना खाकर शाम 8 बजे तल्लीताल बस अड्डे पर पहुंच गया लेकिन अब तक हल्द्वानी जाने वाली बस निकल चुकी थी की तभी एक कैब आकर मेरे सामने रुकी और 200 रूपये में हल्द्वानी ले जाने को बोला और कहा बस एक सवारी और मिल जाये फिर निकलते है लेकिन मेरा मन तो अब भी नैनीताल में ही था और वापस जाने का मन ही नहीं हुआ मैंने उससे बोला मैं 10 मिनट में सोचकर बताता हूँ की जाना है या नहीं जाना है मैंने घर पर फोन करके आज ना आने की बोलकर और गाड़ी वाले को भी ना बोलकर वापस उसी होटल में आ गया और सो गया | 
मेरी ये पोस्ट ज्यादा लम्बी हो रही है इसलिए इसे अब कुछ शार्ट कर रहा हु 
सुबह उठकर कुछ देर तक और मैंने यहां की खूबसूरती का दीदार किया और कैपिटल सिनेमा के पास पार्क में खाली पड़ी बेंच पर बैठ गया मेरी प्रेमिका ने इस बेंच पर बहुत सारा समय बिताया था मै उसी की यादो में खो गया | पार्क में स्कूल के लड़को का एक ग्रुप माइक्रोस्कोप से हिमालय की चोटियों को देखकर कुछ विश्लेषण कर रहा था| फिर मैंने बड़ी हिम्मत कर के वापस जाने का सोचा की तभी मेरे फोन की घंटी बजी. ...... 
उसी लड़की का फोन था बोली कहा हो तुम तो मैंने कहा कैपिटल के पास बोली ठीक है, 15 मिनट बाद फिर फोन बजा और बोली पीछे मुड कर तो देखो। ...... 
मैंने देखा की मेरी जिंदगी मेरे सामने थी। ........इतने साल ना मिलने की सारी शिकायते दूर हो चुकी थी, पास आकर दोनों ने हाथ मिलाया और हाथो में हाथ थामे हम लोग धीरे धीरे कदमो से चहलकदमी करते हुए ठंडी सड़क तक गए, सारा समा खूबसूरत था जिंदगी एक हसीन शै लग रही थी उसकी मीठी बोली बड़ी प्यारी थी, झील सी आंखे और सबसे खूबसूरत शहर की सबसे खूबसूरत लड़की वो | प्यार में बिताया गया एक पल जिंदगी का सवसे हसीन लम्हा होता है उस पल को हम कभी न मिटने वाली स्मृतियों के पिटारे में रखते है लेकिन जहा पर मिलना होता है वही पर बिछड़ना भी लिखा गया है और उस बिछड़न का दर्द सौ दर्दो से बुरा है मिलने के बाद हमारा भी बिछड़ना लिखा हुआ था मुझे वापस जाना था और पता भी नहीं था कब मिलना लिखा हो........ 
लॉन्ग डिस्टेंश रिलेशन शिप की यही विडम्बना है

नोट - पढ़ने और पसंद करने के लिए आप सभी का धन्यवाद मैंने कुछ भी पहली बार लिखा है और कमिया होना लाजिमी है 
मैं बिलकुल भी इतना काबिल नहीं हूँ की नैनीताल की खूबसूरती को अपने शब्दों में बाँध सकूँ एक छोटा सा प्रयास था नैनीताल मेरे दुसरे घर जैसा है और दुनिया की सबसे खूबसूरत जगह है|

दिसम्बर आखिर मे अच्छी ठण्ड होती है और यहां की उपरी जगहो पर बर्फबारी की सम्भावना हो जाती है, और स्नोफाल भी होता है | यहां नैनीझील मे बोटिंग कीजिये और झीले भी है खुर्पाताल नौकुचिया ताल भीमताल और दर्शनीय स्थल है हिमालय दर्शन, स्नोव्यू, टिफिनटाप, सुसाइड पाइंट, लवर पाइन्ट, चिडियाघर, केव गार्ड्न, चीना(नैनापीक) पीक, राजभवन, सेंटजोंस विल्ड्र्नेस चर्च,Pangot and Kilbury Bird Sanctuary,मालरोड और भोटिया मार्केट मे शापिंग, और रोपवे का भी मजा ले सकते है, बहुत कुछ और भी है| कुछ दूरी पर रानीखेत, अल्मोडा, मुक्तेश्वर भी हिल स्टेशन है जा सकते है|

नैनीताल मे होट्लों की भरमार है अपनी सुविधानुसार चुन सकते है और मई जून मे अधिकांश होटल फुल होते है और इस समय भयन्कर ट्रैफिक के कारण कभी कभी गाडियो को शहर के बाहर ही रोका जाता है जब शहर की पार्किंग फुल हो जाती है|

खाने के लिये सभी तरह के होटल ढाबे रेस्त्रां है| 

नैनीताल जाने के लिये नैनीताल मे रोड्वेज बस अड्डा है यहां पर हल्द्वानी बस अड्डे से हमेशा बस मिलती है और टैक्सी भी हर समय मिल जाती है|

नजदीकी रेलवे स्टेशन काठगोदाम है दिल्ली से रानीखेत एक्सप्रेस तथा और दूसरे शहरों से गाडी मिल जायेगी

नजदीकी हवाई अड्डा देहरदून का जौलीग्रांट एअरपोर्ट है

 

नैनादेवी मन्दिरडीएसबी रोड से झील का झरोखा

6 comment(s).
Guest User



Very nice story and written with a good sense.i have read all the parts and found great. Hope you keep sharing your personal experiences which teach a lot to others.
Reply  Cancle

Very well written about your journey and nainital. You look a very emotional and lovely person . I hope we will read some more stories from you in future.
Reply  Cancle

बहुत अच्छी कहानी है आपकी और बहुत रोमांचक तरीके से लिखा भी है आपने।जीवंत कर दिया है हर एक दृश्य को पढ़ने वाले कि नज़र मे।बहुत कम लोग इस तरह विस्तार पूर्वक और रोमांचक तरीके से लिख सकते हैं। आशा है कुछ और भी पढ़ने को मिलेगा आपकी कलम से।
Reply  Cancle

Rupesh bangari जी कहानी तो खत्म होने के लिये ही बनती है....| Anonymous Visitor जी आपका धन्यवाद
Reply  Cancle

बंधु, आपकी ये लव स्टोरी आधी सी लग रही है।शायद ये कहानी साल 2016 की है,अब तो 2018 भी जाने वाला है तो आपकी कहानी कहाँ तक पहुँची?
Reply  Cancle

क्या बात है।बहुत ही अच्छा विवरण दिया है।आपने सही कहा कि नैनिताल की खूबसूरती को शब्दों मै नही व्यक्त कर सकते।
Reply  Cancle

 
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