अंतिम पहर का ख्वाब

By kartikey tripathi
Last modified 24 Nov 2018


पहाड़ी शहर आज नीरस सा है...
मैं झील की रेलिंग पर हाथ पर हाथ रखे खड़ा झील को देख रहा हूँ
झील मुझसे पूछ रही है अरे! तुम फिर आ गए यहाँ... किसने बुलाया तुम्हे..? किससे मिलने आये हो तुम..? तुम्हारा क्या खो गया है यहाँ जो बार बार यहां ढूंढने आ जाते हो..
तुम्हारा है ही क्या यहाँ......
मेरे घर तो सब सिर्फ घूमने ही आते हैं तुम क्या करने आ जाते हो बार बार 
तुम्हारे लिए यहां कुछ भी नही है लौट जाओ वापस...
मैं ऊपर पहाड़ की तरफ़ देखता हूँ ....हमेशा पहाड़ से आने वाली ठंडी हवा मुझे लू से भी गर्म लग रही nainital
पहाड़ मुह फेर रहा है मुझसे.....
मैं निशब्द सा खड़ा माल रोड को देखता हूँ मालरोड की बिजलियों से चमक गायब है उसने मेरे लिए अंधेरा कर दिया है।
एक हवा का झोंका सूखे जमीन पर गिरे हुए पत्तों को मेरे ऊपर से उड़ा ले जाता है ....
चारो तरफ से आवाजे आती है तुम्हारा यहां कोई नही है.....

मैं थके हुए कदमो से वापस अपने घर को लौट रहा हूँ.......

3 comment(s).
Guest User



बिल्कुल कीर्ति जी
Reply  Cancle

This post says a lot about your love story which you have written in last 4 parts.You are right, a few love stories has a happy ending.
Reply  Cancle

Where is the love story finally completed ...? very less......
Reply  Cancle

 
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